पापा के नशेड़ी दोस्तों की रंडी बानी

मेरे पापा मिस्टर प्रभात कुमार एक सफल बिजनेसमैन हैं और मम्मी सन्ध्या एक हाउस वाइफ हैं. मेरी मम्मी कभी कभी पापा को उनके बिजनेस में हेल्प भी करती हैं.
उनकी मदद किस तरह की होती है, ये मुझे बताने की जरूरत नहीं है, आप लोग खुद ही समझ सकते हैं.

जब पापा की कोई डील फाइनल नहीं हो रही होती थी, तब मम्मी अपनी जवानी का जादू बिखेर कर उस डील को पापा को दिलवा देती थीं.

मेरी बड़ी बहन जिज्ञासा एक एनजीओ में सामाजिक सेवा कर रही है.
उसकी शादी की बातें भी चल रही हैं.

मेरे माता पिता काफी उच्च शिक्षा प्राप्त हैं. फिर भी मेरी फैमिली काफ़ी चुदक्कड़ है और सभी लोग सेक्स का मज़ा भरपूर लेते हैं.

अभी मेरे पापा 43 साल के हैं जबकि मेरी मम्मी 42 साल की हैं लेकिन वो लगती 28 साल की हैं.

मेरी मॉम नियमित रूप से योग और एरोबिक्स करती हैं.
कभी कभी तो नए लोग मेरी मम्मी और मेरी बहन को छोटी और बड़ी बहन समझ कर ग़लती कर देते हैं.

छोटी बहन और मेरे हरामी दोस्त

दोस्तो, मेरी एक आदत है कि अगर मैं कुछ पाने की ठान लेता हूँ, तो मैं पागल कुत्ते की तरह उसके पीछे पड़ जाता हूँ.
इसी लिए मेरी लाइफ स्टाइल में बड़ा सुधार भी आया है.

ये बात पिछले साल की सर्दियों की है. उस समय क्रिसमस का मौका चल रहा था.

उन दिनों मैं कैम्पस इंटरव्यू की तैयारी कर रहा था.
मेरी सर्दियों की छुट्टियां हुई थीं.

उस साल मेरे पापा और मम्मी शिमला जाने की प्लानिंग कर रहे थे.
पापा और मम्मी ने मुझे और दीदी को ये बात बताई, पहले तो मैंने ये कह कर मना कर दिया कि मैं अभी इंटरव्यू के लिए काफ़ी मेहनत कर रहा हूँ, मैं नहीं जा सकता हूँ. आप लोग मेरे बिना ही चले जाओ.

पापा ने कहा- बेटा सन्नी, हम लोग तेरे बिना ये ट्रिप एंजाय नहीं कर पाएंगे.
मम्मी और दीदी ने भी मुझे काफ़ी मनाने की कोशिश की.

मैं और ज्यादा इमोशनल अत्याचार सह नहीं पाया और मैंने हां कह दिया.

दोस्तो, उन दिनों मेरी सेक्सुअल लाइफ एकदम बकवास हुई पड़ी थी.
मैंने मुठ मारना भी छोड़ दिया था क्योंकि मैं अपने करियर के बारे में काफ़ी गम्भीर था.

मैं सेक्स करना और मुठ मारने को एक गलत आदत समझता हूँ.
खैर इस बकचोदी को बाद में लिखूंगा.

हम लोग क्रिसमस के दो दिन पहले शिमला के लिए रवाना हुए.
मम्मी ने शॉर्ट कुर्ती और जींस पहनी हुई थी.

पापा ने अपने दोस्त मिस्टर इन्द्रेश को कॉल करके बता दिया था.

मिस्टर इन्द्रेश मेरे पापा के कॉलेज के टाइम के दोस्त थे.
उनकी पत्नी मिसेस रूचिका भी मेरे पापा और मम्मी को कॉलेज के टाइम से जानती थीं.

मिस्टर इन्द्रेश का शिमला में होटल बिजनेस था और वो काफ़ी धनाढ्य थे.
मेरे पापा ने उनकी फैमिली को कई बार मदद की थी.

एक बार इन्द्रेश अंकल का बिजनेस जब घाटे में चल रहा था तो पापा ने उनकी आर्थिक मदद की थी.

दूसरी बार मिस्टर इन्द्रेश का बेटा ईशान जब शराब के नशे में अपनी लाइफ बर्बाद कर रहा था, तब मेरे पापा ने ही उसे गाइड करके उसे अपनी तरह एक सफल बिजनेसमैन बना दिया था.

तीसरी बार मिस्टर इन्द्रेश की बेटी कशिश की शादी की समस्या चल रही थी, उसका एनआरआई पति उसे छोड़ देना चाहता था.
मेरे पापा ने उस समस्या को भी हल कर दिया था और कशिश की शादीशुदा जिंदगी को एक नया रास्ता दिखाया था.

इसलिए इन्द्रेश और उनका परिवार मेरे पापा और मम्मी को बहुत चाहते थे.

हम लोग शिमला स्टेशन से सीधा इन्द्रेश अंकल के घर की तरफ चले.

वहां पर उनकी फैमिली ने हम सभी का गर्मजोशी से स्वागत किया.
मिस्टर इन्द्रेश का घर किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं था.

उनके घर में इन्द्रेश अंकल, रूचिका आंटी के अलावा उनकी बहू रुखसार भी थी.
ईशान बिजनेस के सिलसिले में अमेरिका गया था.

उसी दिन शाम को कशिश अपनी ससुराल से आने वाली थी.

शाम को हम लोग बातें कर रहे थे, तभी कशिश भी घर पहुंच गई थी.
वो हम लोगों से मिल कर बहुत खुश हुई. उसने मुझे कसके अपने गले से लगाया.

बीवी का पिछला प्यार

मुझे उसके बड़े बड़े बूब्स का अहसास हुआ.
वो मुझसे दो साल बड़ी थी. इसलिए मैं उसे दीदी बुला रहा था.

उसने मुझे झप्पी देते हुए मेरे गाल पर एक पप्पी भी दे दी.

कशिश- सन्नी, कितना बड़ा हो गया रे … लगता है हम सबको तो भूल ही गया!
मैं- क्या बात कर रही हो दीदी! आपको कैसे भूल सकता हूँ.

मेरी दीदी जिज्ञासा इन्द्रेश अंकल के घर ना रुक कर अपने एनजीओ के काम से चली गयी.

खाना खाकर मैं रात को अपने कमरे में सोने चला गया. कशिश दीदी और रुखसार भाभी अपने कमरे में टीवी देख रही थीं.
पापा मम्मी और इन्द्रेश अंकल, रूचिका आंटी मेरे कमरे से लगे हुए एक बड़े से हॉल में टीवी देख रहे थे और गप्पें मार रहे थे.

मुझे नींद नहीं आ रही थी. मैं दरवाज़े पर कान देकर हॉल में होने वाली बातों को आसानी से सुन पा रहा था.

रूचिका आंटी मेरे पापा से बोल रही थीं.

रूचिका आंटी- प्रभात, कॉलेज के टाइम मैं आपको मुझे चोदने का काफ़ी मौका मिला, फिर भी आपने उसका फायदा नहीं उठाया. मैं तो इसी लिए आपसे नाराज़ हूँ.
पापा- भाभी, एक तो इन्द्रेश मेरा सबसे अच्छा दोस्त आपको प्यार करता था, दूसरी बात मैं सन्ध्या डार्लिंग (मेरी मम्मी) के प्यार में पागल था.

मैं उनकी ये बात सुन कर शॉक्ड हो गया.
अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं उठ कर दरवाजे के की-होल से उन्हें देखने लगा.

रूचिका आंटी- पर आज तो पूरा मौका मिला है … आज तो मुझे चोद डालो प्लीज़. आज सन्ध्या भी कुछ नहीं बोलेगी.
आंटी ने सन्ध्या की तरफ आंख मारते हुए कहा.
उनकी इस बात से सब लोग हंसने लगे.

मैं दरवाजे के की होल से झांकने में लगा था मगर वहां से सब कुछ अच्छे से दिखाई नहीं पड़ रहा था तो मैं एक टेबल के ऊपर चढ़ कर रूम के रोशनदान की तरफ से अन्दर झांकने लगा.

मैंने देखा एक तरफ चिमनी में आग जल रही थी.
उन लोगों ने फर्श पर नीचे ही एक गद्दा बिछाया हुआ था, उसी पर सब लोग बैठे थे.

एक तरफ रूचिका आंटी पापा को पागलों की तरह किस कर रही थीं.
उन्होंने गोल्डन कलर का टाइट शॉर्ट कुर्ता और चूड़ीदार पजामा पहना था.
उसमें वो काफ़ी सेक्सी माल लग रही थीं.

रूचिका- प्रभात आप मेरे मम्मों को दबाओ न प्लीज़ … कब से मेरे मम्मों को आपके हाथों का इन्तजार था.
पापा रूचिका आंटी के मम्मों को उनकी कुर्ती के ऊपर से दबाने लगे थे.
उनके दबाने से रूचिका आंटी को मजा आने लगा था.

बहन को पड़ोस के लड़को के साथ गैंगबैंग करवाया

रूचिका- एक मिनट रूको डार्लिंग. अभी पूरा मजा लो न.

ये बोल कर उन्होंने अपनी कुर्ती खोली और अपनी टाइट सिल्क ब्रा को निकाल फैंका.
उनके गोरे और बड़े बड़े मम्मे बाहर निकल आए.

पापा- अरे वाह भाभी, क्या बात है … आपकी साइज़ तो मेरी बीवी से काफ़ी बड़ी हो गयी है. लगता है इन्द्रेश इन पर काफ़ी मेहनत करता है.
रूचिका- मेरे दूध आपको अच्छे लगे … तो देखते क्या हो जानू … टूट पड़ो न मेरी चूचियों पर. आज ये आपको मस्त कर देंगी.

पापा ने उनकी एक तरफ़ की चूचि को हाथ में पकड़ा और आटे की तरह गूँथना शुरू कर दिया.
वो आंटी की दूसरी चूचि को अपने मुँह में लेकर खा रहे थे.

दस मिनट बाद रूचिका आंटी ने पापा की पैंट और अंडरवियर निकाल कर एक तरफ फेंक दी.

फिर रूचिका आंटी किसी सड़क छाप रंडी की तरह पापा के बड़े लंड को मुँह लेकर चूसने लगीं.
वो पापा के लौड़े को आइसक्रीम की तरह चूस रही थीं.

पापा- ऊ भाभी … मेरी प्यारी भाभी, आपके होंठ मदहोश कर देने वाले हैं.

रूचिका आंटी की लाल लिपस्टिक ने पापा के लंड को बंदर के लंड की तरह लाल बना दिया.

फिर 5 मिनट बाद रूचिका आंटी ने खुद ही उठ कर अपनी पजामी निकाल दी.
अब उनके शरीर पर एक लाल रंग की सिल्की पैंटी ही बची थी.

पापा ने आंटी को चित लिटाया और अपनी जीभ रूचिका आंटी की चूत पर पैंटी के ऊपर से फेरने लगे.
अगले ही झटके में पापा ने उनकी पैंटी भी निकाल फैंकी.

अब वो एकदम मादरजात नंगी थीं.
क्या दूधिया बदन था आंटी का!

पापा फिर से उनकी चूत चाटने लगे.
रूचिका आंटी चिल्ला चिल्ला कर अपनी चूत चटवा रही थीं- आह उई मां … कितना मज़ा आ रहा है … आज मेरी चूत को खा जाओ प्रभात डार्लिंग … ये भोसड़ी का मेरा गांडू पति मेरी चूत को चाटता ही नहीं मादरचोद!

मैं ये सुनकर हैरान था कि आंटी सबके सामने अपने पति को गाली दे रही थीं.

फिर दस मिनट बाद आंटी की चूत झड़ने की पोजीशन में आ गई और उनके मुँह से गर्म आवाजें निकलने लगी- आआहह … जानू … मैं झड़ने वाली हूँ … आह मैं तो गई जानू!

ये कह कर रूचिका आंटी ने अपनी चूत से फव्वारा छोड़ दिया.
उनकी चूत से बहुत सारा पानी निकलने लगा और पापा ने आंटी की चूत में मुँह अड़ा दिया और वे रूचिका आंटी की चूत का सारा पानी पी गए.

रूचिका- प्रभात प्लीज़ … अब मुझे चोद डालो डार्लिंग. मुझसे अब रहा नहीं जाता!

पापा ने भी बिना देर किए अपना मोटा लंड रूचिका आंटी की चूत पर लगा दिया और एक जोरदार झटके से पूरा का पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
आंटी की जोरदार चीख निकल गई- आई मर गई आह जान … क्या मूसल घुसा है आज … आह मजा आ गया मेरी जान!

फिर पापा ने रूचिका आंटी की टांगें फैला कर उनकी चूत का भोसड़ा बनाना चालू कर दिया.
वो ताबड़तोड़ आंटी को चोदने लगे.

रूचिका आंटी हस्बैंड फ्रेंड सेक्स का चिल्ला चिल्ला कर मजा ले रही थीं- उई ईईई … मादरचोद … धीरे से चोद … बहनचोद अभी सारी रात पड़ी है. मुझे भी अपनी बीवी समझ मेरी जान!

पापा आंटी के चिल्लाने की बिना परवाह किए हुए मज़े ले लेकर उन्हें चोद रहे थे.

🔊Hindi Audio Sex Kahani – छोटे भाई के मोटे लॉन्ड

पूरे रूम में फ़चाफच की मधुर आवाज़ गूँज रही थी.

दूसरी तरफ मम्मी, इन्द्रेश अंकल के लंड को ज़ोर ज़ोर से हिला रही थीं.
इन्द्रेश अंकल को शर्म आ रही थी.

इन्द्रेश- भाभी प्लीज़.
मम्मी हंसती हुई बोलीं- इन्द्रेश भाई, आप भी बच्चों की तरह बन रहे हो … देखो न आपकी बीवी और मेरे पति मज़े से चोदा चोदी का खेल रहे हैं.

यह कह कर मम्मी ने अपनी लंड मुठियाने मारने की स्पीड बढ़ा दी.
इन्द्रेश अंकल चिल्लाते हुए- आह सन्ध्या भाभी … धीरे से करो प्लीज … आह मेरा केला छिल जाएगा आह!

कुछ मिनट बाद इन्द्रेश अंकल के लंड की मां चुद गई.
‘ऊह भाभी मैं तो गया … आह.’ यह कह कर 5-6 शॉट में ही इन्द्रेश अंकल ने अपनी मलाई निकाल दी.

अंकल के लंड से रबड़ी टपकाने के बाद मम्मी ने अपनी कुर्ती ब्रा और जींस निकाल फैंकी.
अब वो सिर्फ़ चड्डी में थीं.

फिर उन्होंने अपनी चूचियां इन्द्रेश अंकल के मुँह में दे दीं- इन्द्रेश जानू, लो मेरी चूचियों को खाओ … इनका रस चूसो.
इन्द्रेश अंकल मज़े से मम्मी की बड़ी बड़ी चूचियों का आनन्द उठाने लगे.

मम्मी ने अपने हाथों से इन्द्रेश अंकल के लंड को सहला कर फिर से खड़ा कर दिया.

अन्तर्वासना

दोस्तो, आपको मेरे मम्मी पापा और अंकल आंटी की ग्रुप सेक्स वाली चुदाई की कहानी पसंद आई होगी. मेल जरूर कीजिएगा.
इस हस्बैंड फ्रेंड सेक्स कहानी का अगला भाग आपको कल पढ़ने मिलेगा.